रत्न कोई ऐसा भाग्यशाली पत्थर नहीं जो किसी महीने में जन्मे हर व्यक्ति पर जँचे। ज्योतिष में रत्न किसी एक ग्रह को बल देता है — और यह तभी फ़ायदा करता है जब वह ग्रह आपके पक्ष में काम करता हो। ग़लत रत्न उस ग्रह को मज़बूत कर सकता है जो आपकी कुंडली में परेशानी देता है।
नौ ग्रहों के रत्न (नवरत्न)
| ग्रह | रत्न | अंग्रेज़ी नाम |
|---|---|---|
| सूर्य | माणिक | Ruby |
| चंद्र | मोती; विकल्प: चंद्रकांत मणि | Pearl; Moonstone |
| मंगल | मूंगा | Red coral |
| बुध | पन्ना | Emerald |
| गुरु | पुखराज | Yellow sapphire |
| शुक्र | हीरा; विकल्प: सफ़ेद पुखराज या ओपल | Diamond |
| शनि | नीलम | Blue sapphire |
| राहु | गोमेद | Hessonite |
| केतु | लहसुनिया | Cat's eye |
राशि से ज़्यादा लग्न क्यों मायने रखता है
सूर्य राशि या जन्म के महीने से रत्न बताने वाली सूचियाँ सबसे ज़रूरी बात भूल जाती हैं: आपका लग्न। लग्न से तय होता है कि कौन-से ग्रह आपके मित्र हैं।
- पहले, पाँचवें और नौवें भाव (त्रिकोण) के स्वामी आम तौर पर शुभ होते हैं, इसलिए इनके रत्न आम तौर पर पहली पसंद होते हैं।
- छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामियों में सावधानी चाहिए, और इनके रत्न आम तौर पर नहीं पहने जाते।
- बाकी ग्रहों का फ़ैसला उनकी स्थिति और बल से होता है।
उदाहरण: मेष लग्न के लिए मंगल पहले भाव का, सूर्य पाँचवें का और गुरु नौवें भाव का स्वामी है, इसलिए मूंगा, माणिक और पुखराज आम तौर पर अनुकूल रहते हैं। बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी है, इसलिए पन्ना आम तौर पर नहीं पहना जाता — भले ही वह लोकप्रिय रत्न हो।
आपकी दशा भी मायने रखती है
जिस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, उसका आपके जीवन पर गहरा असर होता है। उस ग्रह का रत्न बहुत मदद कर सकता है — या नुकसान, अगर ग्रह कमज़ोर या बुरी स्थिति में हो। इसीलिए जो रत्न किसी दोस्त के काम आया, ज़रूरी नहीं कि आपके भी आए।
गुणवत्ता: क्या देखें
- प्राकृतिक और बिना ट्रीटमेंट वाला — काँच, सिंथेटिक या भरे हुए रत्न नहीं।
- हर रत्न के साथ जेम-टेस्टिंग लैब का प्रमाणपत्र।
- आकार से ज़्यादा साफ़पन और रंग: सही वज़न का साफ़, अच्छे रंग वाला रत्न बड़े पर दोषपूर्ण रत्न से बेहतर काम करता है।
- वज़न आपकी कुंडली और बजट के हिसाब से बताया जाता है, आम तौर पर कैरेट या रत्ती में।
- रत्न त्वचा को छूना चाहिए, इसलिए उसे नीचे से खुली अँगूठी या लॉकेट में जड़ा जाता है।
कैसे पहनें
हर रत्न अपने ग्रह के दिन, तय उँगली में और तय धातु में पहना जाता है। हमारे यहाँ मिलने वाले रत्नों के लिए:
| रत्न | दिन | उँगली | धातु |
|---|---|---|---|
| पुखराज | गुरुवार | तर्जनी | सोना |
| पन्ना | बुधवार | कनिष्ठा (छोटी उँगली) | सोना या चाँदी |
| मूंगा | मंगलवार | अनामिका | सोना या ताँबा |
| चंद्रकांत मणि | सोमवार | कनिष्ठा या अनामिका | चाँदी |
| गोमेद | शनिवार | मध्यमा | चाँदी |
| लहसुनिया | मंगलवार | मध्यमा | चाँदी |
उस दिन सुबह, ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित करने के बाद रत्न पहनें। हमसे मँगवाए गए रत्न अभिमंत्रित होकर, लिखित निर्देशों के साथ आते हैं।
इन रत्नों में ख़ास सावधानी
नीलम, गोमेद और लहसुनिया जल्दी और तेज़ असर करते हैं। परंपरा से नीलम को पक्का पहनने से पहले कुछ दिन आज़माया जाता है। इन तीनों को कुंडली जाँच के बिना कभी न पहनें।
पता नहीं कौन-सा रत्न आपके लिए सही है?
अपनी जन्म-जानकारी भेजें। उमेश जी आपका लग्न और दशा देखकर बताएँगे कि कौन-सा रत्न — अगर कोई — मदद करेगा, और कितने वज़न में।